Yeh Wohi Geet Hai
ये वही गीत है, जिसको मैने,  धड़कन में बसाया है
तेरे होंठों से इसको चुराकर,  होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है,  ये वही गीत है
मैने ये गीत जब गुन-गुनाया,
सज गई है खयालों की महफ़िल
(प्यार के रंग आँखों में छाये, 
मुस्कुराई उजालों की महफ़िल   ) - २
ये वो नग़मा है जो ज़िंदगी में,  रोशनी बनके आया है
तेरे होंठों से इसको चुराकर ...
मेरे दिल ने यही गीत गाकर, जब कभी तुझको आवाज़ दी है
फूल ज़ुल्फ़ों में अपनी सजाकर, तू मेरे सामने आ गई है - २
तुझे अक़्सर मेरी बेखुदी ने,  सीने से लगाया है
तेरे होंठों से इसको चुराकर ...
Yeh vahi geet hai, jisko maine,  dhadkan mein basaya hai
Tere hothon se isko churakar,  hothon pe sajaaya hai
Yeh vahi geet hai,  yeh vahi geet hai
Maine yeh geet jab gun-gunaaya,
Saj gayi hai khayaalon ki mehfil
(Pyar ke rang aankhon mein chhaye, 
Muskurayi ujalon ki mehfil   ) - 2
Yeh voh nagma hai jo zindagi mein,  roshni banke aaya hai
Tere hothon se isko churakar ...
Mere dil ne yahi geet gaakar, jab kabhie tujhko aawaaz dee hai
Phool zulfon mein apni sajaakar, tu mere saamne aa gayi hai - 2
Tujhe aksar meri bekhudi ne,  seene se lagaaya hai
Tere hothon se isko churakar ...